Tuesday, May 26, 2009

दोस्तों ये मेरा पहला ब्लॉग है।
आप सभी का मेरे ब्लॉग पर हार्दिक अभिनन्दन है।
अपने देश और अपने घर से दूर रहकर मै कैसा महसूस
करती हूँ ये अनुभव आपके साथ बाटने की चाहत ने मुझे कविता
लिखने के लिए प्रेरित किया। .यहाँ पर मैंने अपने अनुभवों को कुछ
लाइंस में व्यक्त किया है। आशा करती हूँ आपको पसंद आई होगी ।
आपका प्यार और स्नेह साथ रहा तो लिखती रहूंगी।
कोई चूक हो गई हो तो माफ़ी चाहती हू आप सभी से ...
सुरुचि

Nostalgia..



अपना गांव

मै अपने गाँव जाना चाहती हूँ।
जाड़े की नरम धूप और वो छत का सजीला कोना
माँ के किस्से, मूंगफली के दाने, और वो गुदगुदा बीछोना
मै अपने गाँव जाना चाहती हूँ।
धूप के साथ खिसकती खटिया,किस्सों की चादर व सपनों की तकिया
दोस्तों की खुसफुसाहट, हँसी के ठहाके यदा-कदा अम्मा और जीजी के तमाशे
मे अपने गाँव जाना चाहती हूँ।
हाथों को बगलों में दबाए आंच पर चढा चाय का भगोना
सब बातो में गुम हैं, कोई फरक नही पड़ता किसी का होना ना होना
फिरभी भूल नही पाती जाड़े की नरम धूप और वो छत का सजीला कोना
मैं अपने गाँव जाना चाहती हूँ